पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था; पर्यावरण
संदर्भ
- विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अनुसार, भारत कम लागत वाली सौर ऊर्जा और बैटरी तकनीक का उपयोग कर स्वयं को वैश्विक इलेक्ट्रो-टेक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। यह पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं और चीन द्वारा अपनाए गए जीवाश्म ईंधन-प्रधान विकास मॉडल को दरकिनार करता है।
प्रमुख मुख्य बिंदु
- भारत की ऊर्जा संप्रभुता की पहल उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक त्वरित मार्गदर्शक मॉडल बन सकती है।
- भारत में सौर ऊर्जा कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 9% है, जबकि चीन की तुलना में प्रति व्यक्ति कोयले का उपयोग काफी कम है।
- विद्युत वाहन (EVs): यात्री विद्युत वाहनों की बिक्री कुल का लगभग 5% तक पहुँच रही है, जबकि विद्युत तीन-पहिया वाहन बाजार का लगभग 60% हिस्सा रखते हैं, जिससे भारत इस क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बन गया है।
- भारत की प्रति व्यक्ति विद्युत खपत लगभग 1,500 kWh तक पहुँच चुकी है। सौर ऊर्जा + भंडारण की लागत नई कोयला परियोजनाओं की तुलना में लगभग आधी है।
- भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र छह गुना बढ़कर 130 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, जिससे सौर पैनल, बैटरियों और EVs के विस्तार को समर्थन मिला है।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र

- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक है।
- 2014–15 में 78% मोबाइल आयात करने से लेकर आज लगभग सभी उपकरण घरेलू स्तर पर निर्मित किए जा रहे हैं।
- भारतीय इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के शीर्ष 5 निर्यात गंतव्य (FY 2024–25): अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और इटली।
- विगत 10 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण ने 25 लाख रोजगार उत्पन्न किए।
- भारत का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र तीव्र गति से विकसित हुआ है; पाँच प्रमुख परियोजनाओं को ₹1.52 लाख करोड़ के निवेश के साथ स्वीकृति मिली।
- भविष्य अनुमान: 2026 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 300 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
भारत में स्वच्छ ऊर्जा
- 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 500.89 GW तक पहुँच गई है।

- गैर-जीवाश्म स्रोत (नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत, परमाणु): 256.09 GW – कुल का 51% से अधिक।
- जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोत: 244.80 GW – कुल का लगभग 49%, जिसमें कोयला लगभग 74% विद्युत उत्पादन में योगदान देता है।
- नवीकरणीय ऊर्जा के भीतर:
- सौर ऊर्जा: 127.33 GW
- पवन ऊर्जा: 53.12 GW
- FY 2025–26 में भारत ने 28 GW गैर-जीवाश्म क्षमता और 5.1 GW जीवाश्म ईंधन क्षमता जोड़ी।
सरकारी पहलें
- मेक इन इंडिया (2014): भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने हेतु।
- फेज़्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम (2017): मोबाइल फोन और उनके पुर्जों में घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना।
- उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना (2020): मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर पैकेजिंग में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना।
- प्रोत्साहन: पात्र कंपनियों को 3%–6% तक।
- अवधि: 5 वर्ष।

- सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम (2021): घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रोत्साहन और साझेदारी के माध्यम से बढ़ावा देना।
- 2025 तक भारत का प्रथम स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन हेतु तैयार होगा।
- SPECS योजना: इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर विनिर्माण हेतु पूंजीगत व्यय पर 25% वित्तीय प्रोत्साहन।
- इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना: ₹22,919 करोड़ की निधि के साथ स्वीकृत, छह वर्ष की अवधि और एक वर्ष की तैयारी अवधि।
- अपेक्षित निवेश: ₹59,350 करोड़।
- उत्पादन: ₹4,56,500 करोड़।
- रोजगार: 91,600 प्रत्यक्ष एवं अनेक अप्रत्यक्ष।
- उभरती प्रौद्योगिकियाँ एवं परियोजनाएँ: बैटरी भंडारण, हाइब्रिड सिस्टम और RTC पावर को समर्थन।
- अपतटीय पवन एवं फ्लोटिंग सौर परियोजनाओं को बढ़ावा।
- हरित हाइड्रोजन विकास हेतु हाइड्रोजन मिशन पर ध्यान।
- अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ:
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत द्वारा वैश्विक सौर सहयोग को बढ़ावा देने हेतु।
- स्वच्छ ऊर्जा निवेश एवं तकनीक के लिए देशों एवं वैश्विक निधियों के साथ सहयोग।
- यह संपूर्ण परिदृश्य दर्शाता है कि भारत ऊर्जा संप्रभुता, स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में तीव्र गति से वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है।
Source: AIR
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